Friday, July 31, 2009

चल ए दिल कही....

चल ए दिल कही खो दे हुम खुद को
न याद रहे ये दुनिया हमको
न याद आये हम दुनिया को......

अपनी ही सान्सो की बस आवाज सुनाई दे
अपनी ही धडकन शोर मचाये
रोक ले थोडा सा हम वक्त को.......

दुनिया की भीड मे तन्हा सा
मेरा मासूम दिल है घबराया सा
चल थोडा सा प्यार करे अब खुद को......

उम्र यून्ही कट जायेगी एक दिन
सब समेता हुआ येही रेह जयेगा
कौन है जो समेटे तब तेरी यादो को.....

जब अपने हि सन्ग हसना रोना है
जब अपना घम खुद है भुलाना है
तो क्यून बांधू मै किसी उम्मीद को....

हर आस यूं ही टूटा करेगी
फिर भी इस दिल मे आस रहेगि
कभी तो समझेगा कोइ इस दिल को......

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